ईरान परमाणु डील और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से रिकॉर्ड तेल सप्लाई का पूरा सच

ईरान परमाणु डील और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से रिकॉर्ड तेल सप्लाई का पूरा सच

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अचानक एक ही दिन में 19 मिलियन बैरल तेल का गुजरना कोई सामान्य बात नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसे एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताया। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए डिप्लोमैटिक समझौते के तुरंत बाद यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उनका कहना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से गिरी हैं और दुनिया अब एक सुरक्षित जगह बन गई है। लेकिन क्या ग्राउंड रियलिटी वाकई वैसी ही है जैसी वाइट हाउस से दिखाई जा रही है?

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कई पेंच फंसे हुए हैं। एक तरफ वाइट हाउस दावा कर रहा है कि ईरान ने भविष्य में अपने परमाणु ठिकानों की 100% जांच कराने की पूरी गारंटी दी है। दूसरी तरफ तेहरान ने इस तरह की किसी भी न्यूक्लियर डील या संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को अनुमति देने की बात से साफ इनकार कर दिया है। जब दो महाशक्तियां और रणनीतिक दुश्मन एक ही टेबल पर बैठकर अलग-अलग दावे कर रहे हों, तो सच को समझने के लिए गहराइयों में जाना बेहद जरूरी हो जाता है। If you enjoyed this post, you might want to read: this related article.

हॉर्मुज संकट और 19 मिलियन बैरल का हैरान करने वाला आंकड़ा

डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग में बेहद आक्रामक और सीधे अंदाज में कहा कि कल हॉर्मुज से जितना तेल गुजरा उतना इतिहास में कभी नहीं देखा गया। उन्होंने इसे एक 'ऑयल गशर' नाम दिया। हॉर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच का एक बेहद संकरा और संवेदनशील समुद्री रास्ता है जहां से सामान्य दिनों में औसतन 17 मिलियन बैरल कच्चा तेल रोज गुजरता है। अचानक 19 मिलियन बैरल का आंकड़ा सामने आना यह दिखाता है कि पिछले 40 दिनों से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही सैन्य तनातनी के बाद यह एक अस्थाई उबाल हो सकता है।

कमोडिटी मार्केट और शिपिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल की आवाजाही तभी मुमकिन है जब टैंकरों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया गया हो। पिछले दिनों जब ईरान ने हॉर्मुज को बंद करने की चेतावनी दी थी, तब ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम $75 से $85 प्रति बैरल के बीच झूल रहे थे। ट्रंप के बयान के बाद मार्केट में थोड़ी राहत देखी गई और ब्रेंट क्रूड घटकर $77.45 पर आ गया। लेकिन तेल बाजार पर नजर रखने वाले स्वतंत्र विश्लेषक अब भी सैटेलाइट डेटा और वेसल ट्रैकिंग के पुख्ता सबूतों का इंतजार कर रहे हैं ताकि ट्रंप के आंकड़ों की सत्यता जांची जा सके। For another perspective on this event, see the latest coverage from Associated Press.

अमेरिका का मास्टरस्ट्रोक या ईरान की मजबूरी

असल में यह पूरी कहानी स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में पिछले हफ्ते शुरू हुई थी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी राजनयिकों के बीच एक गोपनीय बैठक हुई। इस बैठक के बाद ही अमेरिका ने ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थाई छूट देने का ऐलान कर दिया। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इसके लिए जनरल लाइसेंस X जारी किया। इसका मतलब है कि 21 अगस्त तक ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कच्चा तेल और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बिना किसी रुकावट के बेच सकता है।

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने भी सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि उनके कुछ फ्रीज किए गए एसेट्स को अनब्लॉक किया जा रहा है और देश के पुनर्निर्माण के लिए एक बड़ा प्लान तैयार हो रहा है। मगर ट्रंप ने इस राहत के पीछे एक सख्त शर्त जोड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को मिलने वाला फंड अमेरिकी नियंत्रण वाले एस्क्रो अकाउंट्स (Escrow Accounts) में रहेगा। इस पैसे का इस्तेमाल ईरान केवल अमेरिका से अनाज, मक्का, सोयाबीन और मेडिकल सप्लाई खरीदने के लिए कर सकता है। ट्रंप ने इसे एक मानवीय सहायता का रूप दिया है क्योंकि ईरान इस समय भोजन और दवाओं की भारी किल्लत से जूझ रहा है।

परमाणु हथियारों और यूएन जांच पर आमने-सामने के दावे

इस पूरे समझौते में सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर खड़ा हो गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु बम नहीं बना पाएगा क्योंकि उसने संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को अपने यहां खुली जांच की अनुमति देने का वादा किया है। ट्रंप ने यहां तक चेतावनी दे डाली कि अगर ईरान इस बात से मुकर रहा है तो अमेरिका इस बातचीत को इसी पल रोक देगा।

इसके विपरीत ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई का बयान बिल्कुल अलग कहानी बयां करता है। बगाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्विट्जरलैंड की बैठक में परमाणु मुद्दे पर बेहद संक्षिप्त बात हुई थी लेकिन किसी बारीकी या नियम पर कोई सहमति नहीं बनी। ईरान उन परमाणु ठिकानों पर किसी भी विदेशी इंस्पेक्टर को जाने की इजाजत नहीं देगा जिन पर पिछले साल अमेरिका या इजरायल ने हमले किए थे। तेहरान का यह सख्त रवैया दिखाता है कि यह डील अभी केवल कागजों पर है और इसकी बुनियाद बहुत कमजोर है।

इजरायल का विरोध और मिडल ईस्ट का नया समीकरण

इस नए अमेरिकी-ईरानी समीकरण ने इजरायल को बेहद असहज कर दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि उनके देश की सेनाएं ईरान के परमाणु खतरे को रोकने के लिए कोई भी स्वतंत्र एक्शन लेने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। पिछले दिनों जब ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल के अराद और डिमोना इलाकों पर गिरी थीं, तो दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी। इजरायल का मानना है कि प्रतिबंधों में ढील देकर अमेरिका ईरान को दोबारा से मजबूत होने और अपनी प्रॉक्सी ताकतों (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) को फंडिंग करने का मौका दे रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए इसके तीन मुख्य पहलुओं को देखना होगा:

  • 60 दिनों की मोहलत: अमेरिकी प्रतिबंधों पर मिली यह अस्थायी छूट सिर्फ 21 अगस्त तक ही लागू है, जो एक टेस्ट पीरियड की तरह है।
  • कंट्रोल रूम अमेरिका के पास: हॉर्मुज का रास्ता खुल जरूर गया है, लेकिन अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत अब भी वहां तैनात हैं ताकि किसी भी गड़बड़ी पर नाकेबंदी दोबारा की जा सके।
  • इजरायल का फैक्टर: इजरायल इस डील के खिलाफ कभी भी सैन्य कदम उठा सकता है, जिससे मिडल ईस्ट में दोबारा हिंसा भड़कने का खतरा बना हुआ है।

वैश्विक तेल बाजार के नजरिए से देखें तो यह समझौता एक शॉर्ट-टर्म रिलीफ जैसा है। अगर आप एनर्जी स्टॉक्स या ग्लोबल मार्केट पर नजर रखते हैं, तो आने वाले कुछ हफ्ते बेहद उतार-चढ़ाव भरे हो सकते हैं। ईरान के परमाणु ठिकानों की जमीनी हकीकत और ट्रंप के दावों के बीच का यह अंतर ही आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों की सही दिशा तय करेगा।

LM

Lily Morris

With a passion for uncovering the truth, Lily Morris has spent years reporting on complex issues across business, technology, and global affairs.